Ratlamseho: Historical journey from Rs 1,499 to Rs 2.11 lakh
The Times of Post
सच के साथ, रतलाम की आवाज़ दिनांक: 31 मार्च, 2026 | वार: मंगलवार स्थान: रतलाम (मध्य प्रदेश)
हेडलाइन: रतलाम के जय किशन वासनवाल ने पेश की मिसाल: पुश्तैनी बिजनेस छोड़ ‘डिजिटल रतलाम’ को बनाया अपना जुनून, 2.11 लाख लोगों ने थामी बांह
रतलाम। आज के डिजिटल युग में सफलता की परिभाषा बदल रही है। जहाँ लोग सरकारी नौकरियों या जमे-जमाए व्यापार की सुरक्षा खोजते हैं, वहीं रतलाम के एक युवा जय किशन मराठा पिता श्री राजेश) वासनवाल ने अपनी एक अलग राह चुनकर सबको चौंका दिया है।
जय ने अपने स्थापित बिजनेस को अलविदा कहकर केवल एक लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित किया—अपने शहर रतलाम की संस्कृति, खान-पान और यहाँ की हर छोटी-बड़ी हलचल को दुनिया के सामने लाना। उन्होंने ‘Ratlamseho‘ नाम से एक डिजिटल प्लेटफॉर्म की शुरुआत की, जो आज रतलाम की धड़कन बन चुका है।
Ratlamseho: Historical journey from Rs 1,499 to Rs 2.11 lakh
1,499 से 2.11 लाख तक का ऐतिहासिक सफर
जय की यह यात्रा आसान नहीं थी। शुरुआती दौर में उनके पास मात्र 1,499 फॉलोअर्स थे और सिर्फ 52 पोस्ट्स के साथ उन्होंने संघर्ष शुरू किया था। उस वक्त जय ने सोशल मीडिया पर लिखा था— “हिम्मत कर रहे हैं भाइयों, सपोर्ट जरूरी है आपका।” आज उनकी उसी ‘हिम्मत’ और कड़ी मेहनत का नतीजा है कि ‘Ratlamseho‘ पर 2 लाख 11 हजार (211K) से ज्यादा फॉलोअर्स का परिवार जुड़ चुका है। जय अब तक 1,905 से अधिक पोस्ट्स के जरिए रतलाम के चप्पे-चप्पे की जानकारी लोगों तक पहुँचा चुके हैं।
क्या कहते हैं जय वासनवाल?
पोर्टल से चर्चा के दौरान जय ने बताया कि—
“बिजनेस छोड़ना एक बड़ा रिस्क था, लेकिन मुझे अपने शहर और अपनी क्रिएटिविटी पर भरोसा था। आज जब लोग मुझे ‘रतलाम से हो’ के नाम से पहचानते हैं, तो लगता है कि मेरा फैसला सही था। यह सफलता मेरी नहीं, बल्कि हर उस रतलामी की है जिसने मुझ पर भरोसा किया।”
