रतलाम शासकीय मेडिकल कॉलेज में सोनोग्राफी के लिए एक माह की प्रतीक्षा, बीमारी का खतरा जा सकती है जान?

रतलाम शासकीय मेडिकल कॉलेज में सोनोग्राफी के लिए एक माह की प्रतीक्षा, बीमारी का खतरा जा सकती है जान?

रतलाम शासकीय मेडिकल कॉलेज में सोनोग्राफी के लिए एक माह की प्रतीक्षा, बीमारी का खतरा जा सकती है जान?

रतलाम शासकीय मेडिकल कॉलेज में सोनोग्राफी के लिए एक माह की प्रतीक्षा, बीमारी का खतरा जा सकती है जान?

गरीब मरीज इलाज कराएं तो कैसे?
जांच में देरी से बढ़ सकता है बीमारी का खतरा जा सकती है जान

One-month wait for sonography at Ratlam Government Medical College; could the delay in diagnosis prove fatal?

’’रतलाम।’’ रतलाम स्थित लक्ष्मीनारायण शासकीय मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में सोनोग्राफी जांच के लिए मरीजों को लगभग ’’एक माह तक प्रतीक्षा’’ करनी पड़ रही है। इससे गरीब एवं ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले मरीज सबसे अधिक परेशान हैं। अस्पताल के चक्कर लगाने को मजबूर मरीजों का कहना है कि डॉक्टर तत्काल सोनोग्राफी करवाने की सलाह देते हैं, लेकिन अस्पताल में लंबी प्रतीक्षा के कारण समय पर जांच नहीं हो पा रही है।

यदि यह स्थिति सही है, तो यह केवल एक प्रशासनिक समस्या नहीं बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर विषय है।

रतलाम शासकीय मेडिकल कॉलेज में सोनोग्राफी के लिए एक माह की प्रतीक्षा, बीमारी का खतरा जा सकती है जान?

सोनोग्राफी में देरी से क्या हो सकते हैं नुकसान?

सोनोग्राफी केवल एक सामान्य जांच नहीं है, बल्कि कई गंभीर बीमारियों की पहचान का प्रमुख माध्यम है। इसमें देरी होने पर गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य पर जोखिम बढ़ सकता है।
पेट, लीवर, किडनी, पित्ताशय एवं अन्य अंगों की गंभीर बीमारी का समय पर पता नहीं चल पाता। ट्यूमर, पथरी, आंतरिक रक्तस्राव या संक्रमण जैसी समस्याओं का इलाज देर से शुरू होता है।

मरीज की बीमारी गंभीर होकर ऑपरेशन या जान का खतरा भी बढ़ा सकती है।

डॉक्टर भी बिना आवश्यक जांच के उचित उपचार शुरू करने में कठिनाई महसूस करते हैं।

गरीब मरीज सबसे अधिक प्रभावित

आर्थिक रूप से कमजोर मरीज निजी सेंटरों पर 1200रूपये या उससे अधिक खर्च कर जांच कराने में सक्षम नहीं होते। ऐसे में वे सरकारी अस्पताल पर निर्भर रहते हैं। यदि सरकारी अस्पताल में भी समय पर जांच उपलब्ध न हो तो गरीब मरीजों के सामने इलाज रुक जाने की स्थिति बन रही है। जीसे आप फोटो में स्पष्ट रूप से देख सकते है।

मरीज व स्टाफ में सोनोग्राफी को लेकर बहस करते हुवे देखा जा सकता है स्टाफ के कहने पर कि आपको एक माह का इंतजार करना पडेगा सोनाग्राफी कराना है तो ऐसे में यह एक गंभीर समस्या को जन्म दे रहा है। प्रशासन इस ओर ध्यान नही देते हुवे अपनी वाह-वाही लुटने में लगा है।
पुर्व में रतलाम के मेडिकल कालेज कई मामलो में चर्चाओं में रहा है चाहे वह सफाई हो या इलाज समय पर नही मिल पाना, या कर्मचारीयो की लापरवाही, यहा तक की दिल्ली आई टीम द्वारा रतलाम मेडिकल कालेज को लेेकर सवालो के घेरे मे है ऐसे में यह नया सवाल, सवाल पर सवाल खडा करता है।

अस्पताल प्रबंधन से उठ रहे सवाल

यदि अस्पताल में प्रतिदिन बड़ी संख्या में मरीज आ रहे हैं तो प्रशासन को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि पर्याप्त संख्या में रेडियोलॉजिस्ट उपलब्ध हों। किन्तु ऐसा नही किया जा रहा है।

अतिरिक्त सोनोग्राफी मशीनें संचालित क्यो नही हों रही है।
गंभीर मरीजों के लिए अलग आपातकालीन स्लॉट निर्धारित क्यो कर पा रहे है।
जांच की ऑनलाइन एवं पारदर्शी व्यवस्था लागू होने के बावजूद इस प्रकार समस्या क्यो कैसे बनी हुई है।
मशीन खराब होने पर तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था आखीर क्यो नही की जा रही है।
क्यो आखीर एक ही सोनाग्राफी मशीन के भरोसे एवं एक ही रेडीयोलाजीसट के भरोसे नाव को चलाया जा रहा है।

आखीर जिम्मेदार अधिकारियों की क्या जिम्मेदारी है?

शासकीय मेडिकल कॉलेज के डीन एवं अस्पताल प्रशासन की जिम्मेदारी है कि मरीजों को समय पर आवश्यक जांच उपलब्ध कराई जाए। यदि जांच में अत्यधिक विलंब हो रहा है तो प्रशासन को कारणों की सार्वजनिक जानकारी देना चाहिए तथा समस्या के समाधान के लिए तत्काल कदम उठाने चाहिए। ऐसा आखीर कब से चल रहा है और कब तक चलेगा क्या मरीज की जान के साथ यह खीलवाड उचित है?

क्या कार्रवाई हो सकती है?

यदि जांच में अनावश्यक विलंब प्रशासनिक लापरवाही, स्टाफ की कमी, मशीनों के अनुपयोगी रहने या कुप्रबंधन के कारण हो रहा है, तो सक्षम प्राधिकारी द्वारा जांच कर निम्न कार्रवाई की जा सकती है।

पूरे मामले की प्रशासनिक जांच।
जिम्मेदार अधिकारियों से स्पष्टीकरण।
आवश्यक होने पर विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई।
स्टाफ एवं संसाधनों की तत्काल उपलब्धता।
स्वास्थ्य विभाग द्वारा निरीक्षण एवं सुधारात्मक निर्देश।

अस्पताल प्रबंधन को निर्देश

क्या किए जाने चाहिए तत्काल उपाय?

  1. अतिरिक्त सोनोग्राफी मशीन की व्यवस्था।
  2. अनुबंध या नियमित रेडियोलॉजिस्ट की नियुक्ति।
  3. गंभीर मरीजों, गर्भवती महिलाओं एवं आपात मामलों को प्राथमिकता।
  4. आवश्यकता पड़ने पर अन्य सरकारी अस्पतालों में रेफरल व्यवस्था।
  5. प्रतिदिन जांच की संख्या बढ़ाने हेतु अतिरिक्त शिफ्ट संचालित करना।
  6. प्रतीक्षा सूची सार्वजनिक कर पारदर्शिता सुनिश्चित करना।

जनहित का विषय

स्वास्थ्य सेवाएं प्रत्येक नागरिक का अधिकार हैं। यदि मरीजों को एक आवश्यक जांच के लिए कई सप्ताह तक प्रतीक्षा करनी पड़े तो यह व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता का संकेत है। जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग एवं मेडिकल कॉलेज प्रबंधन को इस विषय का संज्ञान लेकर समस्या का त्वरित समाधान करना चाहिए ताकि किसी भी मरीज का इलाज केवल जांच में देरी के कारण प्रभावित न हो।

जिम्मेदारो का कहना है कि
कालेज की डीन श्रीमती अनीता मुथा से इस विषय पर चर्चा करना चाही किन्तु उनकी और से कोई स्पष्ट जवाब नही दिया गया ना ही फोन पर इस विषय में बात की गई।

पीआरओ डा.विनय शर्मा से चर्चा करने पर बताया गया जल्द ही हम इस समस्या को दुर करेंगे, उपाय किये जा रहे है, जिससे मरीज का इलाज, सोनाग्राफी तुरंत हो सकें। इसके लीय आगे प्रशासन को सुचना दी गई है।

रतलाम शासकीय मेडिकल कॉलेज में सोनोग्राफी के लिए एक माह की प्रतीक्षा, बीमारी का खतरा जा सकती है जान?

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