प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय

प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय

प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय

रतलाम। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय

प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के दिव्य दर्शन भवन, डोंगरे नगर सेवाकेंद्र पर माउंट आबू से पधारी ज्ञानामृत पत्रिका की संपादिका राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी उर्मिला दीदी के सान्निध्य में स्व-उन्नति के लिए दो दिवसीय गहन योग तपस्या कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया।

कार्यक्रम के प्रथम दिवस ब्रह्माकुमारी उर्मिला दीदी ने योग तपस्या का वास्तविक लक्ष्य स्पष्ट करते हुए कहा कि साधना का अर्थ केवल ध्यान में बैठना नहीं, बल्कि अपने जीवन को प्रत्येक प्रकार के विकार, बुराइयों और नकारात्मक संस्कारों से सुरक्षित रखना है। उन्होंने कहा कि जैसे एक अगरबत्ती दुर्गंध से भरे वातावरण में भी स्वयं अपनी सुगंध फैलाती रहती है, उसी प्रकार परिस्थितियाँ कैसी भी हों, एक आध्यात्मिक साधक का कर्तव्य है कि वह अपने श्रेष्ठ संस्कारों, मधुर व्यवहार और दिव्य गुणों की सुगंध समाज में फैलाए।

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दीदी ने उदाहरण देते हुए कहा कि आम का वृक्ष कभी अपने मीठे फल का स्वयं बखान नहीं करता, बल्कि उसकी मिठास ही उसकी पहचान बनती है। इसी प्रकार मनुष्य को भी अपने भीतर विद्यमान आध्यात्मिक गुणों, देवी संस्कारों और स्वधर्म को कभी नहीं भूलना चाहिए। परिस्थितियाँ चाहे कितनी भी विपरीत क्यों न हों, हमें अपने मूल गुणों को सदा जागृत और कर्म में प्रकट रखना चाहिए।

उन्होंने आगे कहा कि आज का मनुष्य बाहरी रिश्तों और भौतिक साधनों में सुख, शांति और प्रेम खोज रहा है, जबकि वास्तविकता यह है कि अधिकांश लोग भीतर से रिक्तता का अनुभव कर रहे हैं। जब आत्मा परमात्मा से सच्चा प्रेम और सच्चा संबंध जोड़ती है, तभी उसे वास्तविक सुख, शांति, प्रेम और आत्मिक संतुष्टि की अनुभूति होती है।

द्वितीय दिवस उर्मिला दीदी ने प्रत्येक व्यक्ति अपने व्यवहार और सकारात्मक ऊर्जा से स्वयं के जीवन का परिवर्तन कर सकता है तथा अपने संपर्क में आने वाले प्रत्येक व्यक्ति को भी प्रेरणा और शक्ति प्रदान कर सकता है। परमात्मा से सर्व संबंध जोड़कर शक्ति प्राप्त करें, तो हम सम्पूर्ण विश्व की आत्माओं को शांति, प्रेम, सहयोग, स्नेह, शक्ति और सुख की दिव्य अनुभूति कराने का माध्यम बन सकते हैं।
दो दिवसीय योग तपस्या कार्यक्रम के दौरान सभी साधकों ने गहन योगाभ्यास, आत्मचिंतन एवं आध्यात्मिक अभ्यास के माध्यम से आत्मबल की अनुभूति की।

कार्यक्रम में रतलाम सहित आलोट,ताल, खाचरौद ,जावरा, नामली, शिवगढ़ एवं आसपास के विभिन्न सेवाकेंद्रों से पधारे भाई-बहनों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए योग साधना का भरपूर लाभ उठाया। उपस्थित सभी साधकों ने इस आध्यात्मिक आयोजन को आत्मपरिवर्तन एवं स्व-उन्नति की दिशा में अत्यंत प्रेरणादायी एवं जीवनोपयोगी बताया।कार्यक्रम के अंत में बच्चों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम की प्रस्तुति भी दी

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