Innovation in watershed planning increases farmers’ income
वाटरशेड योजना के नवाचार से किसानों की आय मे वृद्धि
रतलाम जिले में प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना 2.0 वाटरशेड विकास के तहत् परियोजना 2021- 2022 मे स्वीकृत
हुई। परियोजना क्षेत्र की 16 ग्राम पंचायतो के अन्र्तगत जल एवं मदा संरक्षण, कृषि उत्पादन के कार्य किये जा रहें है । परियोजना संचालक महोदय के मार्ग दर्शन में परियोजना के क्षेत्र मे अधिकतर कृषक परंपरागत रुप से खरीफ मे सोयाबीन, मक्का तुअर की खेती करते थे लेकिन अब क्षेत्र के कृषकों को कलस्टर आधारित सब्जी उत्पादन से जोडकर आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रयास किया गया है जिस से उनकी आय मे उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिली है।
वाटरशेड योजना के नवाचार से किसानों की आय मे वृद्धि
किसानों का कहना है कि पहले मिर्च, टमाटर का उत्पादन होता था परन्तु लगभग 10 वर्ष से मिर्च. टमाटर मे वायरस के कारण क्षेत्र मे लगाना बंद कर दिया था परन्तु परियोजना के माध्यम से वायरस प्रतिरोधी मिर्च की किस्म जैसे कि जी.4 की एण्के 147,वी,नआर.285 किस्मों का चयन किया गया । प्रदेश स्तर से संचालित पायलट प्रोजेक्ट के रुप मे कलस्टर आधारित सब्जी उत्पादन मे दोनों परियाजनोओं से 290 कृषकों को शामिल 120 एकड भूमि पर सब्जी उत्पादन लिया जा रहा है।
उच्च तकनीकी का प्रशिक्षण
जिले की दोनों परियोजना क्षेत्र से 10 उन्नतशील कृषकों का चयन कर लीड कृषक के रुप मे कर सब्जी उत्पादन के लिए उच्च तकनीकी का प्रशिक्षण के लिए भेजा प्रशिक्षण मे सेटनेट नर्सरी विकाशएबैड विधिएमल्चिंगएड्रिप विधि से सिचाई समन्वित कीट एवं रोग प्रबंधन, पेकिंग एवं बाजार प्रबंधन पर प्रदान संस्था व वाल्मी भोपाल मे प्रशिक्षण दिलवाया गया।
वाटरशेड योजना के नवाचार से किसानों की आय मे वृद्धि
प्रशिक्षण के पश्चात हितग्राहियों का चयन वाटरशेड समिति एंव ग्राम सभा के द्वारा चयन कर निजी गतिविधियां के तहत् लाभान्वित हितग्राही लघु एंव सीमांत कृषकों के साथ सघन संपर्क किया गया और उनको सब्जी उत्पादन के लिए लीड फार्मर एवं कृषि विशेषज्ञ के द्धारा तकनीकी का प्रशिक्षण दिया गया ।
कृषकों सब्जी उत्पादन फायदें के संबध में समझाया गया।
मई 2025 मे कृषकों द्वारा चयनित मिर्च एवं बैगन बीज नर्सरी में लगाये यह नर्सरी के लीड फार्मर को राशि 44000 की नर्सरी के लिए परियोजना से अनुदान दिया गया गये और 40 दिन मे पौध तैयार हो गये फिर सभी हितग्राही कृषकों को 3000 मिर्च अथवा बेंगन के पौधें दिये गये सभी कृषकों ने 10 जून तक पौधें रोप दिये गये । किसानों को प्रशिक्षण मे जो शिकाया गया कि माईकोराजा फास्फोरस . सूक्ष्म पोषक तत्व समन्वित उपयोग कितनी मात्रा मे करना है । इस प्रकार 290 कृषकों को 870000 परियोजना से 500000 स्वयं के व्यय से कुल1370000 पौधें के रोप लगााया गया ।
वाटरशेड योजना के नवाचार से किसानों की आय मे वृद्धि
यह रोप प्रत्येक कृषक ने 0. 25 से 0. 60 एकड भूमि पर पौधों को मल्चिंग एवं रिज यमेंढद्ध विधि से रोपकर कुल 123 एकड भूमि पर लगाया गया।
वाटरशेड योजना के नवाचार से किसानों की आय मे वृद्धि
कृषकों ने कमाया 40 हजार तक
रतलाम विकास खण्ड के कृषक, श्री तेजपाल धाकड, श्री प्रभूलाल धाकड, श्री महेश राठौर, श्री भरतलाल धाकड ने बताया कि शुआत मे हम के 75रु प्रति किलोग्राम के रेट मिले थे जैसे मण्डी मे मात्रा बढी वेसे ही कीमत कम होती चली गयी स्थानीय सब्जी मण्डी रतलाम मे 75 से 25 रुपये प्रति किलोग्राम बेच कर औसतन सभी किसानो को 40000 तक लाभ 0. 25 से 0.50 एकड भूमि मे मिला है । इस तरह के नवाचार से फसल चक्र बदला है और किसान की आय मे वृद्धि हुई है ।
